Aatank Ke Rang- Kale Ya Hare

बचपन से ही मुझे फिल्मों में काफी दिलचस्पी रही है। एक दिन यूंही एक फिल्म देखते देखते मेरे मन में ये ख्याल आ गया कि आखिर हर फिल्म में आतंकवादी का किरदार हमेशा मुसलमानों से ही क्यूं ताल्लुक रखता है। और फिर मैं निकल पड़ा अपने इस मन के ख्याल की खोज में। अपने इस सफ़र में मैं रूबरू हुआ इस्लामिक आतंकवाद से, शांति के संदेश देने वाले धर्म के आतंकवाद के ताल्लुकात से, लोगों के मन में घोले जा रहे ज़हर से, अपने फायदे के लिए दुनिया को मुसलमान और गैर मुसलमान में बांटने वाली मानसिकता से, आतंकवाद के खौफनाक चेहरे से और आतंकवाद के मुखौटे के पिछे छिपे उस मासुम चेहरे से भी। खैर, सच की तालाश में निकलना बेहद आसान है, उसके साथ साहस करके चंद कदम चलना भी आसान है। हां, मगर उसी सच की तह तक पहुंच कर उसे विश्व पटल पर उजागर करना बेहद ही मुश्किल है। और इस किताब के माध्यम से मेरा उद्देश्य भी यही है की सच को सच बताना। आतंकवाद के असल चेहरे से आपको रूबरू कराना। इश्वर ने हमें इंसान बना कर भेजा है सिपाही नहीं, आइए जिंदगी जीते हैं।

– पुष्कर विहारी

ISBN 9789389244267
Pages 75
Pushkar Vihari
Pushkar Vihari is a young writer and a poet. Having a mind that is intrigued by what’s happening around, Pushkar writes about what he observes in and around him. His works questions some of the greatest wrongs in our societies and at the same time it touches one of the softest corners of one’s heart. Diversity in writing sets him apart from others, and Pushkar believes that diversity in writing is what can bring the diverse worlds closer together.
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