Jhoole Ja Raha Hun

किसी मेले के सबसे बड़े झूले में बैठ कर गोल-गोल घूमना निश्चित रूप से एक रोमांचक अनुभव होता है। जीवन में भी हम इसी प्रकार कुछ चीज़ों के इर्द-गिर्द घूमते हुए तमाम अनुभवों से गुज़रते रहते हैं। यह पुस्तक मानव-जीवन की उस रचनात्मकता को समर्पित है जो हर प्रकार के उतार-चढ़ाव के बीच निरंतर नई भावनाऐं तलाश लेती है। अलग-अलग प्रेरणाएँ लेकर हम सब जीवन के झूले को झूले जा रहे हैं। यह पुस्तक जीवन के बारे में है। और हर उस भावना के बारे में भी जो जीवन के अनुभवों के साथ आती है और हमें छूकर चली जाती है।
ISBN 9789389244724
Pages 97
Anshuman Singh
अंशुमान सिंह का बचपन एक छोटे से गाँव में साईकल से स्कूल जाते, आम के बगीचों में खेलते, और खेतों में काम करते हुए बीता। शायद साहित्य और संगम की नगरी प्रयागराज के निकट होने का प्रभाव था कि हिंदी कविता बचपन से ही उनके जीवन का अभिन्न अंग बन गयी। पढ़ाई के शौक और रिश्तेदारों से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें बारवीं के बाद पाँच साल के इंटीग्रेटेड कोर्स के लिए आई आई एम इंदौर पहुँचा दिया। गाँव से अलग कॉलेज में एक नई दुनिया से सामना हुआ। प्रतिस्पर्धा की दौड़ में खो जाने के डर के बीच कविताओं से उन्हें अलग पहचान मिली और अपने हुनर को तराशने का मौका भी। हिंदी के अलावा अंग्रेज़ी में भी लिखना पसंद करते हैं। इन दिनों जीवनयापन के लिए राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड में कार्यरत हैं। साहित्य के अलावा लघु फिल्म निर्माण, क्रिकेट, तैराकी, कृषि, अर्थशास्त्र एवं मूर्तिकला में रुचि रखते हैं।
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